मैच की रणनीति

हर गेंद लौटाने वाले खिलाड़ी से फिर हार गए? बेहतर शॉट साबित करने की ज़िद छोड़िए

आपका फ़ोरहैंड ज़्यादा दमदार है, लेकिन स्कोर उसके पक्ष में है। मुमकिन है आपकी हर नई कोशिश उसे ठीक वही खेल दे रही हो जिसमें वह सबसे सहज है।

2011 में ग्रास कोर्ट पर फ़ोरहैंड की तैयारी करते एंडी मरे
जून 2011 में क्वीन्स टूर्नामेंट के दौरान एंडी मरे। यह पुरानी तस्वीर शॉट की तैयारी और कोर्ट पोज़िशन समझाने के लिए है; मरे के पूरे खेल को क्लब टेनिस में इस्तेमाल होने वाले ‘पुशर’ शब्द तक सीमित नहीं किया जा रहा।Carine06 · CC BY-SA 2.0 · WebP

स्कोर 3–5 है और मैच के बाद देने वाला जवाब आपके दिमाग़ में तैयार है। सामने वाला गेंद को रफ़्तार ही नहीं देता। हर गेंद ऊँची लौट आती है। टेनिस आप खेल रहे हैं, वह तो बस दौड़ रहा है। यह बात हार की चुभन थोड़ी कम कर सकती है, लेकिन अगली बार जीतने के काम आने वाला सवाल इसमें छूट जाता है: अपनी पसंद की गेंद मारने का मौक़ा बार-बार किसे मिल रहा था?

अच्छे डिफेंसिव खिलाड़ी को सबसे सुंदर शॉट का इनाम नहीं चाहिए। अगर आपकी तेज़ गेंद को वह अपनी परिचित दौड़ में आराम से वापस भेज देता है, और कुछ देर बाद आप झुँझलाकर गेंद बेसलाइन के बाहर मार देते हैं, तो उसके लिए सब ठीक चल रहा है। इसका हल यह नहीं कि आप भी सिर्फ़ गेंद लौटाने लगें। पहले यह फ़र्क समझना ज़रूरी है कि आपका स्विंग आक्रामक दिख रहा है या अगले शॉट पर विरोधी सचमुच मुश्किल में है।

‘पुशर’ का ठप्पा हटाकर सामने के खिलाड़ी को देखिए

इस एक शब्द के पीछे अलग-अलग तरह के खिलाड़ी छिप जाते हैं। कोई बेसलाइन के साथ दाएँ-बाएँ बहुत अच्छा दौड़ता है, लेकिन आगे आने में असहज है। कोई आपकी रफ़्तार का अच्छा इस्तेमाल करता है, मगर धीमी गेंद पर ख़ुद गति नहीं बना पाता। तीसरा खिलाड़ी केवल सुरक्षित जगहों पर गेंद डालता है, इसलिए डिफेंसिव लगता है; छोटी गेंद मिलते ही वह हमला कर सकता है। इन तीनों के खिलाफ एक ही नुस्खा नहीं चलेगा। ‘मुझे और अटैक करना है’ इतना अस्पष्ट है कि उससे अगला फ़ैसला नहीं निकलता।

सिर्फ़ अपनी गेंद के अंदर गिरने पर ध्यान मत दीजिए। देखिए, उसके बाद क्या हुआ। आपके गहरे क्रॉसकोर्ट फ़ोरहैंड पर विरोधी ने शरीर के आगे आराम से संपर्क किया या पीछे हटते हुए गेंद उठाई? रफ़्तार कम करने पर वह आगे बढ़ा या गेंद का इंतज़ार करता रहा? बीच की तरफ़ लौटते समय क्या वह आसानी से दिशा बदल पाया? काम की कमज़ोरी वह है जिसमें आप बार-बार उसे असुविधाजनक जगह से शॉट खेलने पर मजबूर कर सकें। देखने में अटपटा लगने वाला स्ट्रोक अपने आप में कमज़ोरी नहीं है।

USTA की रनर-पुशर के खिलाफ सलाह में लौटते हुए खिलाड़ी की उलटी दिशा में खेलना और उसे नेट के पास बुलाना शामिल है। दोनों तरीक़े उसकी चाल और कोर्ट पोज़िशन बदलते हैं। इनके लिए पहले से ज़्यादा ताक़तवर फ़ोरहैंड ज़रूरी नहीं। मक़सद उस सवाल को बदलना है जिसका जवाब वह पूरे मैच में आसानी से देता आया है।

खाली कोर्ट दिखे, तो भी उसी ओर मारना ज़रूरी नहीं

मान लीजिए, आपने एक चौड़ी गेंद से विरोधी को सिंगल्स साइडलाइन के बाहर पहुँचा दिया। दूसरी तरफ़ कोर्ट खाली है और अगला शॉट वहीं जाना स्वाभाविक लगता है। कई बार यही सही फ़िनिश होगा। लेकिन तेज़ दौड़ने वाला खिलाड़ी आपकी तैयारी पूरी होने से पहले ही उस तरफ़ लौट रहा हो सकता है। अगर अगली गेंद आप देर से या नीचे की ऊँचाई पर मार रहे हैं, तो खाली जगह पकड़ने के लिए बहुत तीखा कोण बनाने की कोशिश आपकी बढ़त को अनावश्यक ग़लती में बदल सकती है।

इसका अर्थ हर बार आँख बंद करके उसकी पिछली जगह पर गेंद डालना नहीं है। पहले उसकी वापसी पढ़िए। जहाँ से वह अभी निकल रहा है, वहाँ एक नियंत्रित शॉट उसे रुकने, पैर फिर जमाने और दौड़ के सहज तालमेल के बिना गेंद मारने पर मजबूर कर सकता है। आप अपनी बढ़त का इस्तेमाल लाइन छूने के बजाय उसका संतुलन बिगाड़ने में करते हैं। लेकिन उसने लौटना शुरू ही नहीं किया, तो यही गेंद सीधे उसके रैकेट तक पहुँचेगी। सही समय नारे से ज़्यादा मायने रखता है।

इसी वजह से अटैक की दूसरी गेंद पर पहली जितना ही ध्यान देना चाहिए। एक अच्छा क्रॉसकोर्ट शॉट छोटा जवाब दिला सकता है, पर ज़रूरी नहीं कि साफ़ विनर का मौक़ा भी खुल गया हो। हर छोटी गेंद को तुरंत पॉइंट ख़त्म करने का आदेश मानेंगे, तो अपनी ही बनाई स्थिति बर्बाद करेंगे। कोर्ट के भीतर आइए, नेट और लाइनों से पर्याप्त गुंजाइश रखिए और अगला जवाब भी मुश्किल बनाइए। कोई शानदार फ़िनिशिंग शॉट न हो, तब भी पूरा पॉइंट आक्रामक ढंग से खेला जा सकता है।

2013 में ग्रास कोर्ट पर नेट के पास एंडी मरे और निकोला माहू
जून 2013 में मरे और निकोला माहू। आगे बढ़ने से उपलब्ध कोण बदलते हैं और विरोधी का समय घटता है, लेकिन पासिंग शॉट और लॉब की ज़िम्मेदारी भी आपकी होती है। पुरानी तस्वीर।Carine06 · CC BY-SA 2.0 · WebP

नेट पर जाना हिम्मत का ऐलान नहीं, पोज़िशन का फ़ैसला है

इस तरह के मैच में ‘बस नेट पर चले जाओ’ महँगी सलाह साबित हो सकती है। अगर आप खिंची हुई स्थिति में गेंद मारकर आगे जाते हैं, पासिंग के लिए बड़ा रास्ता छोड़ते हैं और विरोधी के संपर्क के वक़्त भी दौड़ रहे होते हैं, तो उसे कोई असाधारण शॉट नहीं चाहिए। पॉइंट हारने के बाद लगता है कि नेट पर खेलना इस खिलाड़ी के खिलाफ काम नहीं करता। असली समस्या शायद वह गेंद और वह जगह थी जिससे आपने आगे जाने का निर्णय लिया।

USTA कोच बेन ज़ाइज़र सिंगल्स में नेट की ओर बढ़ने को कोर्ट के कोणों, पोज़िशन और सही स्थिति से जोड़कर समझाते हैं। इसे छोटे सवालों में बाँटिए। क्या आप अप्रोच शॉट संतुलन में, कोर्ट के भीतर से खेल सकते हैं? उस दिशा में मारने पर विरोधी को किस तरफ़ पासिंग सबसे आसान होगी? क्या आप उसके अगले शॉट से पहले उपयोगी वॉली पोज़िशन तक पहुँचकर तैयार हो पाएँगे? अगर जवाब अच्छे नहीं हैं, तो पीछे रहकर एक और गेंद खेलना डरना नहीं है। इससे पहले की मेहनत से बनी स्थिति बचती है।

लाइन के साथ खेला गया अप्रोच अक्सर यह साफ़ करता है कि आपको कोर्ट का कौन-सा हिस्सा बचाना है, लेकिन यह हर गेंद पर लागू नियम नहीं है। विरोधी कहाँ से संपर्क करेगा, आपका शरीर किस दिशा में जा रहा है और अप्रोच कितना अच्छा था—ये बातें तब भी ज़रूरी हैं। सचमुच खींच देने वाला क्रॉसकोर्ट अप्रोच और हवा में तैरती ऐसी क्रॉसकोर्ट गेंद जिसमें सामने वाले को समय तथा साफ़ कोण मिल जाए, अलग स्थितियाँ हैं। केवल दिशा का नाम देखकर नहीं, वास्तव में गई गेंद देखकर निर्णय कीजिए।

डिफेंडर को ख़ुद आगे बुलाना दूसरा विकल्प है। छोटी और नीची गेंद उस खिलाड़ी से टच, गहराई पर नियंत्रण और अगले शॉट का चुनाव माँगती है जिसे बेसलाइन के पीछे रहना पसंद है। लेकिन अपने बचाव की स्थिति से लगाया गया ड्रॉप शॉट अक्सर तोहफ़ा बन जाता है। छोटी गेंद तभी इस्तेमाल करें जब संपर्क पर आपका नियंत्रण हो और आगे की योजना भी हो। अगर विरोधी आसानी से पहुँचकर अच्छी वॉली कर रहा है, तो जानकारी मिल गई: इसी जगह को बार-बार निशाना बनाना फ़ायदेमंद नहीं है।

सही चुनाव और जीता हुआ पॉइंट एक बात नहीं हैं

एक बेहतरीन पासिंग विनर देखकर अच्छी अप्रोच योजना छोड़ देना ठीक नहीं। उसी तरह एक भाग्यशाली विनर लापरवाही से दिशा बदलने को सही साबित नहीं करता। अभ्यास सेट में पॉइंट के बाद चार बातें संक्षेप में लिखिए: अटैक के लिए कौन-सी गेंद चुनी, संपर्क के समय संतुलन था या नहीं, विरोधी का जवाब कितना सहज था और अंत में पॉइंट किसने जीता। इन चार जानकारियों से सिर्फ़ ‘जीता’ या ‘हारा’ की तुलना में कहीं ज़्यादा समझ आता है।

योजना बदलने से पहले पॉइंट के भीतर देखिए
क्या हो रहा हैअगली बार क्या जाँचना है
विरोधी बार-बार आपको पास कर देता हैअप्रोच गहरा था या उसे सचमुच खींच रहा था? उसके हिट करते समय आप तैयार थे?
पहली छोटी गेंद पर ग़लती हो जाती हैगेंद की ऊँचाई भी सुविधाजनक थी या वह केवल छोटी थी? क्या आप उससे तुरंत विनर माँग रहे थे?
उसकी वापसी के खिलाफ खेलना बेअसर हो गयाक्या उसने जल्दी लौटना बंद कर दिया है? ऐसा है तो खाली कोर्ट फिर अच्छा विकल्प हो सकता है।
छोटी गेंद उसे नेट तक ला रही हैक्या आप उससे नेट की ऊँचाई से नीचे वॉली करवा रहे हैं या आसान फ़िनिश दे रहे हैं?

इस अभ्यास को छोटा ही रखिए। कुछ पॉइंट रणनीति का संकेत देते हैं; वे किसी सार्वभौमिक उपाय का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। उद्देश्य भावनात्मक कारण की जगह ऐसी बात लाना है जिसे देखा जा सके। उसके बाद आप उसी कमी की ट्रेनिंग कर सकते हैं: नीचे की गेंद से अप्रोच, नियंत्रित पहली वॉली या बीच की ओर लौटते खिलाड़ी के पीछे शॉट। अभ्यास की स्थिति मैच जैसी होगी, तो उसका संबंध वास्तविक समस्या से बना रहेगा।

इस सोच का एक और लाभ है: उपकरणों से ऐसे सवाल का जवाब नहीं माँगा जाता जो वे दे ही नहीं सकते। पिछले सेशन के बाद स्ट्रिंगबेड में स्पष्ट बदलाव आया है, तो उसे नोट कीजिए और अलग से सुलझाइए। लेकिन नए स्ट्रिंग्स यह नहीं बताएँगे कि डिफेंडर ने बीच में लौटना कब शुरू किया। रैकेट सेटअप या स्ट्रिंग टेंशन बार-बार दिखने वाली उपकरण संबंधी समस्या के लिए बदलें, न कि उस रणनीतिक बहाने को बचाने के लिए जिसके पक्ष में अब कोई ठोस बात नहीं बची।

अगली मुलाक़ात को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मत बनाइए

क्लब के सबसे धैर्यवान खिलाड़ी से सबसे लंबी रैली जीतना ज़रूरी नहीं। यह साबित करना भी ज़रूरी नहीं कि आपका आक्रामक खेल ही असली टेनिस है। काम को अधिक स्पष्ट रखिए: उसे किस संपर्क पर परेशानी होती है, पहचानिए; सुरक्षित गुंजाइश के साथ वही स्थिति बनाइए; और समझिए कि अगली गेंद अभी तैयारी का हिस्सा है या फ़िनिश का मौक़ा। किसी दिन उलटी दिशा में खेलना चलेगा, किसी दिन चुनिंदा नेट अटैक या उसे आगे बुलाना।

अगर विरोधी अपनी योजना बदलता है, तो आपकी योजना ने काम शुरू कर दिया है। अब दोनों एक-दूसरे के निर्णयों का जवाब दे रहे हैं; आप सिर्फ़ पसंदीदा स्ट्रोक को उसके चूकने तक नहीं दोहरा रहे। ऐसे खिलाड़ी को हराने का सुख यह दिखाने में नहीं कि उसे ‘असली टेनिस आता ही नहीं’। सुख यह पता चलने में है कि आपके अपने टेनिस में भी उस एक शॉट से कहीं ज़्यादा कुछ है जिसे आप बार-बार मारना चाहते थे।

स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. USTA — Tactical Tennis: Beating a Runner-Pusher
  2. USTA — Improve Your Game: Approaching the Net in Singles
  3. USTA — Tactical Tennis: Beating a Serve-Volleyer

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