डबल्स में साथी को “पीछे हटो” कहा। फिर पॉइंट आपके हाथ से क्यों जा सकता है?
साथी से बात करना हर स्थिति में छूट नहीं देता। गेंद की दिशा, प्रतिद्वंद्वी पर असर और आपत्ति का समय छोटी लॉब वाले विवाद का नतीजा तय करते हैं।

आपकी लॉब छोटी रह गई है। साथी अभी नेट के पास है। आप उसे पीछे हटने के लिए चिल्लाते हैं, ओवरहेड मारने जा रहा प्रतिद्वंद्वी ठिठकता है और अचानक बहस शुरू हो जाती है कि पॉइंट उसे मिलना चाहिए या नहीं। “मैं अपने साथी से बात कर रहा था” पूरी सफाई लग सकती है। लेकिन बिना कोर्ट अंपायर के खेल के लिए USTA के निर्देश में इतना कहना पर्याप्त नहीं। आप किसे संबोधित करना चाहते थे, उससे ज़्यादा महत्व गेंद की दिशा और प्रतिद्वंद्वी पर पड़े असर का है।
दूसरी ओर भी उतनी ही अहम सीमा है। सामान्यतः प्रतिद्वंद्वी पहले ओवरहेड आज़माकर, चूक जाने के बाद आपकी आवाज़ को अपनी गलती से बचने का सहारा नहीं बना सकता। प्रकाशित उदाहरण कहता है कि बाधा का दावा समय पर होना चाहिए। इन दोनों पहलुओं को समझना, “डबल्स में हर समय बात कर सकते हैं” या “हमेशा चुप रहना चाहिए” जैसे नारे याद करने से अधिक उपयोगी है।
छोटी लॉब का उदाहरण नियम की किताब में पहले से है
USTA की Friend at Court के 2026 संस्करण में The Code शामिल है, जो बिना अधिकारियों के खेल की प्रक्रियाएँ बताता है। धारा 34 में खिलाड़ी के कमजोर लॉब मारने और “get back” कहकर चिल्लाने का उदाहरण है। यदि इससे उस प्रतिद्वंद्वी का ध्यान भंग होता है जो गेंद मारने ही वाला है, तो वह जानबूझकर की गई बाधा के आधार पर पॉइंट माँग सकता है। अगर वह लॉब खेलने का चुनाव करता है और चूक जाता है, तो पॉइंट हारता है, क्योंकि बाधा का दावा समय पर नहीं किया गया।
यह शोर करने वाली डबल्स जोड़ियों को सज़ा देने के लिए गढ़ी गई व्याख्या नहीं है। USTA का पाठ खुद इसी स्थिति से नियम समझाता है। फिर भी इसका मतलब यह नहीं कि सुनाई देने वाला हर शब्द अपने-आप पॉइंट गंवा देता है। उदाहरण में प्रतिद्वंद्वी के खेल में बाधा शामिल है, और नतीजा इस पर भी निर्भर है कि वह आगे क्या करता है। कोई भी शर्त हटाने पर उदाहरण का अर्थ बदल जाता है।
यह सलाह आगे बताते समय दायरा स्पष्ट रखें। The Code, USTA का बिना अधिकारियों वाले खेल का मार्गदर्शन है; इसे हर महासंघ की प्रतियोगिता प्रक्रिया या चेयर अंपायर के निर्णय का पूरा विकल्प न बताएँ। मूल ITF नियम 26 जानबूझकर की गई बाधा को अलग रखता है, जिसमें बाधित खिलाड़ी को पॉइंट मिलता है। अनजाने में हुई बाधा या बाहरी घटना में पॉइंट दोबारा खेलना पड़ सकता है। यहाँ इस्तेमाल किए गए संवाद और दावा करने के व्यावहारिक निर्देश USTA के पाठ से आते हैं।
केवल बातचीत नहीं, गेंद की दिशा भी देखें
| स्थिति | निर्देश क्या कहता है | इससे क्या निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए |
|---|---|---|
| गेंद आपकी टीम की ओर आ रही है | डबल्स साथियों के बीच बातचीत की अनुमति है। | इससे ऐसी बात की छूट नहीं मिलती जो प्रतिद्वंद्वी की खेलने की क्षमता में बाधा डाले। |
| गेंद प्रतिद्वंद्वी के कोर्ट की ओर जा रही है | डबल्स खिलाड़ियों को बात नहीं करनी चाहिए। | साथी को संबोधित संदेश अपने-आप अपवाद नहीं बन जाता। |
| छोटी लॉब के बाद आपकी चेतावनी, गेंद मारने जा रहे प्रतिद्वंद्वी का ध्यान भटकाती है | समय पर दावा करने से जानबूझकर की गई बाधा के आधार पर प्रतिद्वंद्वी को पॉइंट मिल सकता है। | हर आवाज़ अपने-आप पॉइंट नहीं देती, और शॉट चूकने के बाद दावा करने का दूसरा मौका नहीं मिलता। |
आपकी ओर आती गेंद कौन लेगा, यह पुकारना उस चेतावनी से अलग समय की बात है जो कमजोर वापसी प्रतिद्वंद्वी की ओर जा चुकने के बाद दी जाती है। पहली बात आपकी टीम को अपना शॉट व्यवस्थित करने में मदद करती है। छोटी लॉब के उदाहरण में दूसरी आवाज़ प्रतिद्वंद्वी की तैयारी में दखल देती है। सिर्फ आवाज़ धीमी कर लेना हर समस्या का हल नहीं: पाठ का आधार बाधा पड़ना है, कोई तय डेसिबल सीमा नहीं जो उसमें दी ही नहीं गई।
“जानबूझकर” शब्द भी बहस कराता है। खिलाड़ी कह सकता है कि उसने अच्छी नीयत से चेतावनी दी थी, बेईमानी करने के लिए नहीं। इतना कहना प्रकाशित उदाहरण को जानबूझकर की गई बाधा की श्रेणी से बाहर नहीं करता। यह समझाने के लिए कि पॉइंट क्यों जा सकता है, खिलाड़ी को बेईमान कहने की ज़रूरत नहीं। किताब पहले ही इस स्थिति में सोचकर निकाली गई आवाज़ को चोट या मधुमक्खी के डंक के बाद अनायास निकली चीख से अलग मानती है।
खेल जारी रखने पर दावा क्यों हाथ से निकल सकता है
धारा 33 कहती है कि बाधा का दावा करने वाले खिलाड़ी को जितनी जल्दी संभव हो खेल रोकना चाहिए। किसी आवाज़ से सचमुच ओवरहेड प्रभावित हो तो यही बात याद रखें। यह देखने का इंतज़ार न करें कि आपका शॉट अंदर गिरता है या नहीं। The Code का छोटी लॉब वाला उदाहरण साफ़ तौर पर गेंद खेलने का चुनाव करने और चूकने के बाद पॉइंट माँगने को खारिज करता है। तुरंत दावा उस समय आए व्यवधान को चिन्हित करता है; देर से दावा उसी शॉट के लिए दूसरा नतीजा माँगने जैसा लग सकता है।
इसका मतलब नाटकीय टकराव करना नहीं है। तुरंत बताएँ कि आवाज़ ने शॉट में बाधा डाली, इसलिए खेल रोका है; फिर समय और घटना स्पष्ट करें। “आपने तब पुकारा जब मैं ओवरहेड मारने वाला था” कहना, “आप हमेशा बहुत शोर करते हैं” से अधिक मददगार है। प्रतियोगिता में कोई मैच अधिकारी उपलब्ध हो, तो विवाद में उसे शामिल करें। तथ्य के मतभेद को खिलाड़ी के चरित्र पर आरोप में न बदलें।

चेतावनी, दर्द की चीख और ग्रंटिंग एक श्रेणी नहीं हैं
The Code, छोटी लॉब के बाद पुकारने को चोट या मधुमक्खी के डंक के बाद निकली चीख से अलग करता है। दूसरी स्थिति को अनजाने की बाधा बताता है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी को लेट यानी पॉइंट दोबारा खेलने का अवसर मिल सकता है। धारा 36 एक ऐसी शर्त जोड़ती है जो आगे बताते समय अक्सर छूट जाती है: लेट माँगने वाला खिलाड़ी, बाधा न होती तो शॉट खेल सकने की स्थिति में होना चाहिए। जो गेंद वह वैसे भी नहीं पहुँच सकता था, उसे व्यवधान नहीं बचाता।
ग्रंटिंग के लिए धारा 37 में अलग निर्देश हैं। उस धारा के तहत आने वाली ग्रंटिंग और अन्य तेज़ आवाज़ों पर केवल मैच अधिकारी बाधा का फैसला कर सकता है और तय कर सकता है कि पॉइंट दोहराया जाए या किसका पॉइंट जाए; इसमें पहले दी गई चेतावनी भी विचार में आती है। छोटी लॉब के संवाद वाले उदाहरण को हर उस ग्रंट पर यंत्रवत लागू न करें जो आपको नापसंद हो। मिलती-जुलती आवाज़ों के लिए प्रक्रियाएँ अलग हो सकती हैं। इसलिए केवल “बाधा” शब्द उद्धृत करने से बहस शायद ही सुलझती है।
शरीर की हरकत का मामला फिर अलग है। धारा 35 गेंद खेल में रहने के दौरान शरीर से फ़ेंट करने और स्थिति बदलने देती है, सर्वर के टॉस के समय भी। लेकिन केवल ध्यान भटकाने के लिए हरकत या शोर की अनुमति नहीं देती, जैसे उसी उद्देश्य से रैकेट लहराना या पैर पटकना। नेट पर सामान्य पोज़िशनिंग से दबाव बनाना और ध्यान भटकाने का काम करना एक नहीं है। दिखाई या सुनाई देने वाली हर चीज़ को गैरकानूनी मानने के बजाय असल हरकत परखें।
मुश्किल आने से पहले संवाद की तैयारी करें
नियमित जोड़ी के लिए व्यावहारिक जवाब है कि पॉइंट से पहले अधिक बातें तय कर ली जाएँ। किस खिलाड़ी के ऊपर गई लॉब कौन संभालेगा, आप कैसे अदला-बदली करेंगे और रक्षात्मक वापसी के बाद कहाँ खड़े होना चाहेंगे—इन पर सहमति बनाएँ। ये आखिरी पल की उलझन घटाने के संपादकीय सुझाव हैं, किसी खास फ़ॉर्मेशन को अनिवार्य करने वाले नियम नहीं। न ही ये तस्वीरों के खिलाड़ियों के संवाद की रिपोर्ट हैं। साझा योजना से प्रतिद्वंद्वी के गेंद मारते वक्त निर्देश चिल्लाने की ज़रूरत कुछ कम होती है।
अभ्यास में ध्यान दें कि आपकी चेतावनी कब आती है। अगर हमेशा कमजोर गेंद प्रतिद्वंद्वी की ओर भेजने के बाद ही आती है, तो समस्या धीमी आवाज़ नहीं, देर से स्थिति पहचानना हो सकती है। गेंद अभी आपकी टीम की ओर आ रही हो, तभी रक्षात्मक परिस्थिति पहचानने पर काम करें। लक्ष्य सही समय पर उपयोगी सूचना है, कोई गुप्त शब्दावली नहीं जो कथित तौर पर बाद की हर पुकार को नियमसम्मत बना दे।
बहस हो चुकी हो तो क्रम से घटनाएँ बताएँ: गेंद कहाँ जा रही थी, कौन शॉट की तैयारी कर रहा था, क्या कहा गया, क्या उससे बाधा पड़ी और क्या खेल तुरंत रुका। इससे संबंधित प्रक्रिया को निर्णय का आधार मिलता है। सामान्य तौर पर “साथी बात कर सकते हैं” कहना निर्णायक विवरण छोड़ देता है; हर समय चुप रहने की माँग जायज़ डबल्स संवाद छोड़ देती है।
अनुभवी जोड़ी को तालमेल के लिए लगातार कमेंट्री की ज़रूरत नहीं होती। उसे स्पष्ट समझौते, अपनी ओर आती गेंद व्यवस्थित करते समय सही वक्त की पुकार और प्रतिद्वंद्वी को उसकी वापसी खेलने देने का अनुशासन चाहिए। छोटी लॉब की स्थिति में “मैं तो सिर्फ साथी की मदद करना चाहता था” सच हो सकता है, फिर भी पॉइंट बचाने के लिए काफी न हो।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
TENNIS TENSION LAB
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