टेनिस जूते बहुत मुलायम लगते हैं। तेज़ी से रुकते समय क्या होता है?
पहले कुछ कदम टेनिस जूते के एक हिस्से को परखते हैं। अगला शॉट लगाने से पहले रुकना उससे अलग सवाल पूछता है।

फिट जाँचने के बाद दो जोड़ियाँ पसंद आती हैं। एक में एड़ी रखते ही शानदार नरमी महसूस होती है; दूसरी धीरे चलने पर कुछ सख्त और कम आकर्षक लगती है। मन तुरंत फैसला करना चाहता है कि पहली की कुशनिंग बेहतर है, इसलिए वह शरीर पर भी कम ज़ोर डालेगी। टेनिस के लिए यह फैसला उस अहम हरकत के शुरू होने से पहले ही आ गया, जिसके लिए जूता खरीदा जा रहा है।
बाहर की ओर भागकर फोरहैंड लगाने में रफ्तार रोकना, दिशा बदलना और फिर कोर्ट की ओर धक्का लगाकर लौटना शामिल है। स्प्लिट स्टेप में जूते के अगले हिस्से पर भार पड़ता है। चलते समय एड़ी का आरामदायक लगना उस अनुभव की उपयोगी जानकारी है, लेकिन इन सभी हरकतों के हर हिस्से की नहीं। अधिक नरमी से चोट का जोखिम कम होना भी साबित नहीं होता। खरीदारी की भूल तब होती है जब हम एक वास्तविक अनुभूति से ऐसे सवालों के जवाब माँगते हैं, जिन्हें उसने मापा ही नहीं।
16 जूते, लेकिन उनके भीतर कोई खिलाड़ी नहीं
मार्च 2017 में Tennis Warehouse University के लिए Crawford Lindsey की जाँच में दस निर्माताओं के 16 जूते परखे गए। इसे दोबारा पढ़ने का कारण इसकी पद्धति है; इसे आज बिक रहे मॉडलों की रैंकिंग नहीं मानना चाहिए। सभी नमूने पुरुषों के US साइज़ 9 के दाएँ पैर वाले जूते थे। उनका ऊपरी हिस्सा और इनसोल हटा दिया गया, और सोल को एड़ी तथा अगले पंजे के हिस्सों में काटा गया। इन टुकड़ों को स्टील की प्लेट पर बाँधकर गुरुत्वाकर्षण से नीचे गिरने वाले 7.5 किलोग्राम के इम्पैक्टर से टकराया गया।
इम्पैक्टर चार ऊँचाइयों से गिराया गया: 50, 75, 100 और 125 मिलीमीटर। रिपोर्ट में इनके अनुरूप टक्कर की ऊर्जा क्रमशः 3.7, 5.5, 7.4 और 9.2 जूल दी गई। उपकरण ने बल, आकार में बदलाव, त्वरण और कुछ अन्य मान दर्ज किए। यह तय परिस्थितियों में जूते के अलग हिस्सों की यांत्रिक प्रतिक्रिया की तुलना थी। इसमें मैच की वास्तविक हरकतें दर्ज नहीं की गईं, पूरे जूते का सपोर्ट ढाँचा सुरक्षित नहीं रखा गया और खिलाड़ियों का आगे निरीक्षण करके यह नहीं देखा गया कि किसे चोट लगी।
इस अंतर का मतलब प्रयोग को खारिज करना नहीं है। टक्कर की परिस्थितियाँ एक जैसी रखने से ऐसे फर्क अलग करके देखे जा सकते हैं, जो खिलाड़ी की बदलती हरकतों के कारण छिप जाएँ। ज़रूरत उसके जवाब को ठीक दायरे में पढ़ने की है: इस जूते के इस हिस्से ने इस टक्कर पर ऐसी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद का सवाल—आपका पैर भीतर होने पर पूरा जूता क्या करता है—अलग है।

एड़ी और अगले पंजे से एक ही उम्मीद नहीं की जा सकती
रिपोर्ट में दिए परीक्षणों में अगले पंजे के अपेक्षाकृत पतले हिस्सों पर आम तौर पर एड़ी वाले हिस्सों की तुलना में अधिक चरम बल और मंदन, यानी गति घटने की दर, दर्ज हुई। वे अपनी उपलब्ध मोटाई के अधिक बड़े अनुपात तक दबे और दबाव बढ़ने पर अपेक्षाकृत अधिक सख्त हो गए। अधिक ऊर्जा वाली टक्कर में रिपोर्ट ने अगले पंजे के हिस्से के अपनी दबने की सीमा के करीब पहुँचने की संभावना बताई। इसे अक्सर कुशनिंग का ‘बॉटम आउट’ होना कहते हैं।
कुशनिंग नरमी का असीमित भंडार नहीं है। उसकी एक मोटाई और बनावट होती है, और दबकर आकार बदलने के साथ उसकी प्रतिक्रिया भी बदलती है। अध्ययन में टक्कर की ऊर्जा बढ़ने पर आम तौर पर बल, मंदन, आकार में बदलाव और कठोरता बढ़ी। बल बढ़ने के साथ अधिकतम बल तक पहुँचने का समय और कुल संपर्क अवधि घट गई। कोई पदार्थ हल्के भार में नरम और आरामदायक लग सकता है, लेकिन अधिक तीखी टक्कर सँभालते समय उसका व्यवहार काफी अलग हो सकता है।
इसलिए ‘अच्छी कुशनिंग’ अधूरा विवरण है, जब तक यह न बताया जाए कि जूते के किस हिस्से और किस तरह के भार की बात हो रही है। जो खिलाड़ी अभ्यास का बड़ा हिस्सा अगले पंजे पर उछलने, वापस स्थिति लेने और दिशा बदलने में बिताता है, उसके लिए उस क्षेत्र को खास तौर पर परखना उचित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर किसी को सबसे मोटे अगले सोल की ज़रूरत है या एड़ी की कुशनिंग महत्वहीन है। निष्कर्ष इतना है कि केवल एड़ी की अनुभूति को चुपचाप पूरे जूते का फैसला नहीं बना देना चाहिए।
मशीन में कम झटका, स्थिरता का प्रमाणपत्र नहीं
जाँचे गए हिस्सों में कम कठोरता का संबंध कम बल, भार बढ़ने की कम दर और कम मंदन से था; टक्कर का असर अधिक समय में फैला। परीक्षण की परिस्थितियों में यह कुशनिंग का वास्तविक लाभ है। मुश्किल यह है कि टेनिस में जूते को बगल की ओर होने वाली हरकत और पैर के आसपास अलग-अलग दिशाओं की गति भी सँभालनी होती है। रिपोर्ट बताती है कि जरूरत से अधिक नरमी अनचाही हलचल की गुंजाइश दे सकती है। यह कुशनिंग की जगह और बनावट पर निर्भर करता है।
कारण का निदान किए बिना भी रोज़मर्रा के अनुभव में यह समझौता पहचाना जा सकता है। किसी खिलाड़ी को ज़मीन पर उतरने का एहसास पसंद आ सकता है, लेकिन नियंत्रित ढंग से दिशा बदलते समय जूते के अंदर पैर का खिसकना नहीं। दूसरे को सख्त आधार अच्छा लग सकता है, फिर भी अगले पंजे के नीचे असुविधा हो सकती है। ये अलग-अलग विशेषताओं से जुड़ी टिप्पणियाँ हैं। न पहले खिलाड़ी को दूसरे को गलत कहना ज़रूरी है, न इनमें से कोई एक अनुभव अपने आप जूते में खराबी साबित करता है।
एक और पेचीदगी है: इंसान परिस्थितियों के अनुसार अपनी हरकत बदलता है। रिपोर्ट ऐसे शोध की समीक्षा करती है, जिसमें खिलाड़ियों ने जूते और सतह के संपर्क की प्रतिक्रिया में अपने आंदोलन बदले। यांत्रिक इम्पैक्टर अपना काम दोहराता है, जबकि खिलाड़ी उतरने का तरीका, घुटनों का मोड़ या कदम की लंबाई बदल सकता है। रिपोर्ट यह भी समझाती है कि बल मापने के तरीकों से प्रयोगशाला की कुशनिंग जाँच और इंसानों पर फोर्स प्लेट से लिए मापों के बीच अंतर को कैसे समझा जा सकता है। टक्कर का एक अकेला आँकड़ा इस पूरे परस्पर प्रभाव को नहीं समेट सकता।
हर विकल्प को एक ही तरह परखें
खरीदते समय उपयोगी तुलना तीन सवाल अलग रखती है: क्या जूता सही फिट होता है, जिन हिस्सों पर आप भार डालते हैं वहाँ कुशनिंग कैसी लगती है, और अनुमति वाली टेनिस हरकतों में क्या पूरे जूते की प्रतिक्रिया भरोसेमंद तथा अनुमान के अनुसार रहती है? नीचे दिया तरीका संपादकीय सुझाव है, उस अध्ययन से प्रमाणित परीक्षण प्रक्रिया नहीं। सामान्यतः खेलने वाले मोज़े और चिकित्सक द्वारा बताए गए ऑर्थोटिक इनसोल, यदि हों, इस्तेमाल करें। विक्रेता के ट्रायल नियम मानें और केवल परिचित, आराम से किए जा सकने वाले आंदोलन करें।
| स्थिति | अलग से क्या दर्ज करें | क्या निष्कर्ष न निकालें |
|---|---|---|
| खड़े रहना और आराम से चलना | एड़ी की फिट, उँगलियों के लिए जगह, दबाव वाले बिंदु और तलवे के नीचे की शुरुआती अनुभूति | एड़ी का अच्छा लगना अगले पंजे पर भार पड़ने के दौरान भी आराम की गारंटी है |
| अनुमति हो तो हल्के स्प्लिट स्टेप या एड़ी उठाकर अगले पंजे पर आना | अगले पंजे के नीचे कहाँ सहारा और कहाँ दबने का एहसास होता है | प्रयोगशाला में मापा जाने वाला बल या कठोरता का मान |
| अनुमति हो तो नियंत्रित पार्श्व गति | क्या पैर जूते में अपनी जगह रहता है और जूते की प्रतिक्रिया अनुमान के अनुसार है | किसी व्यक्ति के चोटिल होने की संभावना |
| इस्तेमाल की जाने वाली सतह पर अनुमति के साथ कोर्ट ट्रायल | परिचित टेनिस हरकतों के दौरान फिट और आराम स्वीकार्य बने रहते हैं या नहीं | थोड़ा-सा ट्रायल लंबे समय की टिकाऊपन की भविष्यवाणी कर देता है |
तुलना की परिस्थितियाँ समान रखें। मोज़े बदलना, एक जूता लंबे सत्र के बाद और दूसरा तरोताज़ा रहते हुए पहनना, या अलग साइज़ की तुलना करना अनुभूति बदलने के नए कारण जोड़ देता है। ‘एड़ी आरामदायक, अगले पंजे के नीचे दबाव, बगल में रुकते समय पैर खिसकता है’ जैसा छोटा नोट अगली फिटिंग को ‘बहुत नरम’ से अधिक स्पष्ट दिशा देता है। इससे यह जानने की गुंजाइश भी रहती है कि समस्या कुशनिंग की नहीं, फिट की हो सकती है।
16 जूतों के इस प्रयोग की सबसे उपयोगी सीख किसी विजेता ब्रांड का नाम नहीं है। वह यह है कि एड़ी और अगले पंजे की प्रतिक्रियाएँ अलग होती हैं, और प्रतिक्रिया भार पर निर्भर करती है। दुकान में मुस्कान ला देने वाली नरमी एक उपयोगी जानकारी है। अनुभवी खिलाड़ी के लिए खरीदारी का अधिक खुलासा करने वाला सवाल यह है कि गेंद पहुँचने से ठीक पहले की हरकतों में भी वह आराम बना रहता है या नहीं।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
TENNIS TENSION LAB
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